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Month: July 2018

व्यवस्थित अव्यवस्था आवश्यक है जीवन के लिए…

भावनात्मक अधोगमन के साथ ऊर्जा के उर्ध्वगमन के व्युत्क्रमानुपाती नियम के साथ समानानुपाती रूप से आगे बढ़ते रहिये। प्रेम और पैसे के जोड़ या घटाव के परिणाम की चिंता किये बिना दो समानांतर रेखा की तरह बिना किसी के मिले अपनी रेखा पर सीधे चलते रहिये… क्योंकि हर गोल-मोल रेखा भी सरल रेखा के अंश […]

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दुबई का ‘ग्लोबल विलेज’ : दुनिया का सबसे बड़ा और अनूठा सांस्कृतिक केंद्र

जब भी मैं दुबई आता तो यहाँ के विश्वविख्यात ‘ग्लोबल विलेज’ यानी ‘विश्व ग्राम’ को देखना किसी कारण से संभव नहीं हो पाता था। इस बार समय निकाल कर इस भव्य, दर्शनीय, नयनाभिराम और अद्भुत विश्व-ग्राम को देखने का अवसर मिला। इस विलेज में भारत समेत 27 देशों के पैवेलियन/मंडप हैं, जिनमें इन देशों की […]

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जब सब सोते हैं, तब योगी जागे हुए रहते हैं

योग में तीन अवस्थाओं का वर्णन है. जागृत, स्वप्न, सुषुप्ति. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मन के तीन भाग हैं. चेतन, अवचेतन, अचेतन. यानी जागृतावस्था में चेतन, स्वप्नावस्था में अवचेतन, सुषुप्ति में अचेतन मन विशेष सक्रिय होता है. मनोवैज्ञानिक कहते हैं कि मनुष्य अपनी मानसिक क्षमता का न्यूनतम उपयोग कर पाता है. सुपर जीनियस माने जाने […]

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Life Love Liberation : ध्यान ही जीवन, जीवन ही प्रेम, प्रेम ही परमात्मा

मैं अपनी बात शुरू करूं इसके पहले जानिये बब्बा क्या कह रहे हैं, कोई आध्यात्मिक गुरु, कोई ज्ञानी बात कहता है तो हम उसे जल्दी ग्रहण कर पाते हैं. लाओत्से कहता है, चलो, लेकिन ध्यान नाभि का रखो. बैठो, ध्यान नाभि का रखो. उठो, ध्यान नाभि का रखो. कुछ भी करो, लेकिन तुम्हारी चेतना नाभि […]

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जादू की झप्पी : लाख दुखों की एक दवा है काहे घबराए

उनके पास पैसा, शोहरत, कामयाबी यानी वह सब कुछ था, जो किसी की भी हसरत हो सकती है, फिर चाहे आध्यात्मिक गुरु भय्यू जी महाराज हों या सिलेब्रिटी शेफ एंथनी बॉर्डियन या फिर पुलिस अधिकारी राजेश साहनी। वे जिस मुकाम पर पहुंचे, वहां कम ही लोग पहुंच पाते हैं फिर भी उन्होंने जिंदगी से मुंह […]

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सामाजिक से प्राकृतिक होने की प्रक्रिया का नाम है अध्यात्म

आध्यात्मिक लोग भी दो तरह के होते हैं. एक जो आधुनिक से ग्रामीण हो जाते हैं, मेरे जैसे आदिम, ठेठ… सदैव के अज्ञानी जिन्हें वास्तव में कुछ नहीं आता लेकिन जिससे जो सीखने को मिल जाए सीखता चला जाता है… जितना सीखता जाता है उतना ही ग्राम भी छूट जाता है… छंटाक भर आध्यात्मिकता में […]

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कुम्हारन के हाथ तो सदैव मिट्टी में सने रहते हैं…

कुम्हारन के हाथ तो सदैव मिट्टी में सने रहते हैं… मिट्टी जो उसकी माँ भी है और सखी भी… गुरु भी है और पिता भी… सुहाग है, तो चिता की राख भी… इस मिट्टी को इस बात से कोई लेना देना नहीं कि उसके बने पात्र में किसको पानी पीना नसीब हुआ है, इस मिट्टी […]

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मानो या न मानो : मिट्ठी के जन्म और गुड़वाले बाबा की सच्ची कहानी

माई, ओ माई !! गुड़ रोटी मिलेगी खाने को? आगे जा बाबा… आज कुछ नहीं है देने को. मैं बहुत परेशान हूँ. दे दे ना माई, बस दो रोटी और गुड़. ओ हो बाबा… एक तो मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा और ऊपर से तुम… खैर बाबा तुम्हारा क्या दोष, लाती हूँ गुड़ रोटी. […]

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