मानो या ना मानो -7 : महासमाधि की झलक

पिछले महीने ‘युगन युगन योगी’ यह पुस्तक एक मित्र के माध्यम से जादुई रूप से पहुँची थी… यूं तो मैं…

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मानो या ना मानो – 5 : इच्छापूर्ति के लिए कायनाती षडयंत्र

बात उन दिनों की है जब फैशन डिजाइनिंग का शौक चढ़ा था… अधिकतर ड्रेस मैं अपने हाथों से बना लेती…

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मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति

पिछले वर्ष जीवन एक चिलक हो गया था… चिलक जानते हो ना, पीठ की अकड़न से उठने वाली पीड़ा… भयंकर…

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मानो या ना मानो : उसे जिसको चुनना होता है, वो चुन लेती है

कस्तूरी बहुत परेशान थी किस से कहे अपने मन की बात, कि तभी मकान मालकिन की बहू आयी। वो कलकत्ता…

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