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Month: July 2018

मानो या ना मानो -7 : महासमाधि की झलक

पिछले महीने ‘युगन युगन योगी’ यह पुस्तक एक मित्र के माध्यम से जादुई रूप से पहुँची थी… यूं तो मैं आजकल सद्गुरु को दिन रात यूट्यूब पर सुनती रहती हूँ, लेकिन पुस्तक पढ़ने का जादू क्या होता है वो मैंने ‘वर्जित बाग की गाथा’ और ‘हिमालायीवासी गुरु के साए में श्री एम’ पुस्तक से जाना […]

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मानो या ना मानो – 6 : अग्नि के मानस देवता

मानो या न मानो भाग-5 के आगे… चार साल बाद मिली उस ड्रेस को पहनने के बाद मैं खुद को कहीं की परी समझने लगी थी, उम्र को मैंने कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया इसलिए कोई भी ड्रेस किसी भी उम्र में पहनने में मुझे कभी कोई झिझक नहीं हुई। तो मेरी वह […]

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मानो या ना मानो – 5 : इच्छापूर्ति के लिए कायनाती षडयंत्र

बात उन दिनों की है जब फैशन डिजाइनिंग का शौक चढ़ा था… अधिकतर ड्रेस मैं अपने हाथों से बना लेती थी, बात शायद 2002 के आसपास की होगी, विचार आया था कि अपने इस शौक को क्यों न प्रोफेशनल रूप में सीखकर करियर बना लूं, तो उन दिनों NIFT में दाखिला लेने भी गयी थी […]

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मानो या ना मानो – 4 : पिता के अंतिम दर्शन

पिता की मृत्यु के बाद लिखे दो लेख- सत्य से मुंह फेर कर खुद को समेट समेट कर जीते रहने की आदत औरत में जन्म के साथ पड़ जाती है, क्योंकि वह अपनी माँ को और माँ की माँ को भी इसी तरह जीते हुए देख चुकी होती है। पूछने पर जवाब भी यही मिलेगा […]

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मानो या ना मानो – 3 : मुक्ति के यज्ञ में पिता ने दी आहुति

पिछले वर्ष जीवन एक चिलक हो गया था… चिलक जानते हो ना, पीठ की अकड़न से उठने वाली पीड़ा… भयंकर दर्द… असहनीय… ऐसा कि बस मुंह से अंतिम शब्द जो निकला था … पापा मुझे अपने पास बुला लो… बस अब नहीं जीना मुझे… मैं जीना नहीं चाहती… अपने पास बुला लो… पापा मेरे उलटे […]

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मानो या ना मानो – 2 : हनुमान दर्शन

(यह पिछले वर्ष मुझ पर हुए आध्यात्मिक प्रयोग पर लिखी सम्पूर्ण घटना जीवन पुनर्जन्म का एक अंश भर है) उन दिनों मैं पिछले जन्म में हुए किसी गुनाह के भय से जूझ रही थी जिससे मुक्त करने के लिए मुझ पर प्रयोग हो रहे थे। भय से मुक्ति के लिए एकमात्र साधना है हनुमान तत्व […]

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मानो या ना मानो -1 : चन्दन-वर्षा

इश्क़ जब उम्र का चोला सिलता है तो उसमें मिलन की झालर में लगे तुरपाई के तंतु इतने संवेदनशील हो जाते हैं कि चेतना तक पैरहन के लिए लालायित हो जाती है। आप मानो या ना मानो लेकिन ये ऐसी ही इश्क़ की कहानी है कि मृत्यु के पश्चात भी वो आशिक़ से मिलने आती […]

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रास्ते कभी बंद नहीं होते

मां बाप को बच्चों से ज़्यादा से ज़्यादा चाहिए, वो सब भी जो खुद कभी नहीं कर पाये। उम्मीद का पूरा टोकरा सिर पर लिए घूमते हैं आज के बच्चे। और इस बोझ को ढोने के चक्कर में बचपन, खिलंदड़पना, मस्ती, शोखियाँ, शरारत, चुलबुलापन, शौक, हंसी मज़ाक सब गायब सा हो जाता है ज़िंदगी से। […]

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मानो या ना मानो : उसे जिसको चुनना होता है, वो चुन लेती है

कस्तूरी बहुत परेशान थी किस से कहे अपने मन की बात, कि तभी मकान मालकिन की बहू आयी। वो कलकत्ता से आई हुई थी। उनके परिवार में किसी की मृत्यु होने पर गरुड़ पुराण चल रहा था। वो कस्तूरी को भी बताने आयी थी। थोड़ा बैठी तो कस्तूरी रो पड़ी। कस्तूरी ने प्रेम विवाह किया […]

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मित्रों! झोला उठाने का वक्त आ गया है

यूपी के बाज़ार से पॉलीथीन बेदख़ल हो गई। ठीक हुआ! जब किसी के जीवन में कोई दखलअंदाजी की बेइंतहा कर जायेगा तो उसे बेदखल होना ही पड़ेगा.. सौदा कैसा भी हो… कच्चा, पक्का, सूखा-गीला, ठन्डा-गरम हर एक सौदे के लिये मुंह बाये तैयार रहती थी ये। सबके उंगलियों में लिपटने और लटकने का जो नशा […]

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