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Month: June 2018

रियाज़ की रिकॉर्डिंग्स नहीं होती

सालों पहले की बात है. उस ज़माने में दिनकर जोशी, विट्ठल पंड्या, सारंग बारोट, रजनीकुमार पंड्या से ले कर हरकिशन मेहता, अश्विनी भट्ट, चंद्रकांत बक्शी, सभी समकालीन साहित्यकारों के सभी पुस्तक पढ़ जाता था. उस समय मैं पाठक ज़्यादा और लेखक बेहद कम था. उस समय वरिष्ठ साहित्यकार मोहम्मद मांकड़ (अभी 92 साल के पूर्ण […]

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यात्रा : अंतिम यात्रा पर पहला क़दम

यात्रा और पड़ाव यात्रा प्रेम एवरेस्ट पर्वत पर चढ़ना तो था नहीं कि इस बार मैं नेपाल से न होकर तिब्बत से चढ़ना शुरु करता. प्रेम किसी रोमांचक कहानी को गढ़ना भी नहीं था कि मैं पूरा परिवेश और सारे पात्र ही बदल डालता. इस बार प्रेम सवारी गाड़ी की स्लीपर क्लास में होने वाली […]

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मानो या न मानो : जगदम्बा, एक सच्ची घटना

बोल जाएगा या नहीं??? और बता सबको, क्यों तंग कर रहा इसे?? क्या बिगाड़ा इसने तेरा?? और तभी सामने घेरे में रखा नीबू हिलने लगा जो उड़द के ढेर पे रखा था. मृदुला आंख बंद करके बैठी थी देवी सिंह जी के सामने और मां जगदम्बा की मूर्ति के सामने दिया जल रहा था. कोई […]

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फेसबुक अड्डा : ‘आभा-सी’ दुनिया में मेरा पता

फेसबुक के राजमार्ग से एक छोटी सी पगडंडी मेरे घर की तरफ मुड़ती है, थोड़ी सी पथरीली है. जूते पहनकर आएँगे तो थोड़ी सुविधा रहेगी, लेकिन मेरे घर में प्रवेश से पहले जूते उतारने होंगे. बस ध्यान रखियेगा अपने जूते में पाँव फंसे रहते हैं तो हम सामने वाले के जूते में पैर डालकर उसकी […]

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George Michael : I Knew You Were Waiting

बात 2013 की है, नवंबर के महीने में मैंने जार्ज माइकल को क्रमवार सुनना शुरू किया. जार्ज और अरेथा फ्रेंकलिन का एक डुइट गीत “आई न्यू यू वर वेटिंग फॉर मी” सुना. अच्छा लगा. बाद में भूल गया. एक्सीडेंटली फिर सुनना हुआ. दीपावली अवकाश पर गृहनगर से लौटा तो ताला-चाबी की समस्या के कारण बाहर […]

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प्रेम

मुंबई डायरी पलकों के नीचे जब पसरने लगती है उदासी तो जाते-जाते छोड़ जाती है सुरमे-सा काला रंग, हालांकि मैं नहीं सहेजना चाहती उदासी के बाद आँखों के नीचे बच गए इन गहरे काले निशानों को, पर इन्हीं उदासियों के साथ ही तो लिपटकर तुम्हारी यादें उतरती हैं मेरे हिस्से में…. मैं सोचती हूँ कि […]

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वज़न नियंत्रण : आवश्यकता से अधिक खाते समय, इसके उलट विचार क्यों नहीं आते!

ऐसे एकदम से खाना पीना नहीं छोड़ देना चाहिए, कमज़ोरी आ जाती है.. कैल्शियम की कमी हो जाएगी… अरे हिमोग्लोबिन कम हो जाएगा… चेहरे की सारी चमक चली जाएगी.. त्वचा लटक जाएगी तो झुर्रियां ज़्यादा दिखने लगेगी… शरीर को कम से कम पौष्टिक भोजन तो मिलते रहना चाहिए… पता है खाना कम खाने से भी […]

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काली

कुंठा, पीड़ा, तड़प, अकुलाहट और प्रतीक्षा की लम्बी यात्रा के बाद जब आपका पूरा अस्तित्व ही प्रश्न में परिवर्तित हो जाये तब जाकर उत्तर प्रकट होता है. प्रश्न सिर्फ एक ही होता है अमूमन सबका … आखिर मेरे साथ ही क्यों? उत्तर काली के इस चित्र के साथ प्रकट हुआ, माध्यम हमेशा की तरह ध्यान […]

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कागज़ी दस्तावेज : पिया की प्रतीक्षा में घूंघट ओढ़े बैठी रोज़ एक नई दुल्हन हूँ मैं

हर वर्ष जनवरी की पहली तारीख को बच्चों के दादाजी मुझे उपहार स्वरूप नई डायरी देते हैं. कम्प्यूटर की इस ठक-ठक में कलम अक्सर साथ छोड़ देती है. लेकिन उन्होंने कभी डायरी देना नहीं छोड़ा. उन्हें पता है मेरी आत्मा मेरे लिखे गए मृत शब्दों में हमेशा जीवित रहेगी. डायरी में लिखना अमूमन ना के […]

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भारतीय भोजन थाली से गायब सेंधा नमक और अजीनोमोटो की सेंध

एक समय था जब भारत की पारंपरिक रसोई में सिल बट्टे पर मसाले पीसते समय खड़ा नमक डाला जाता था. काला नमक और सेंधा नमक तो उपवास में खाया जाने वाला नमक था यानी इतना शुद्ध कि नमक खाने से भी व्रत ना टूटे. फिर अचानक से वैश्वीकरण की चकाचौंध में हमें अपनी ही रसोई […]

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