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Month: June 2018

पण्डित राज और लवंगी : गंगा की गवाही कि प्रेम न हारा और धर्म भी जीता

सत्रहवीं शताब्दी का पूर्वार्ध था. दूर दक्षिण में गोदावरी तट के एक छोटे राज्य की राज्यसभा में एक विद्वान ब्राह्मण सम्मान पाता था, नाम था जगन्नाथ शास्त्री. साहित्य के प्रकांड विद्वान, दर्शन के अद्भुत ज्ञाता. इस छोटे से राज्य के महाराज चन्द्रदेव के लिए जगन्नाथ शास्त्री सबसे बड़े गर्व थे. कारण यह, कि जगन्नाथ शास्त्री […]

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Carolyn Hartz : चार पोतों की 70 साल की इस दादी जैसे आप भी हो सकते हैं युवा

मेरी त्वचा से मेरी उम्र का पता ही नहीं चलता… टिंग टोंग संतूर संतूर…. साठ साल के बूढ़े या साठ साल के जवान…. इस तरह के बहुत से विज्ञापन हम देखते आये हैं, विज्ञापन हमारे लिए हमेशा से कार्यक्रम के बीच में आने वाली बाधा रहे हैं… कभी कोई विज्ञापन पसंद भी आ जाता है […]

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फ़ादर्स डे : एक था बचपन, बचपन के एक बाबूजी थे

फादर्स डे के बहाने… अपने पापा के साथ मैं बहुत दोस्ताना नहीं हूँ. पिता-पुत्र के संबंधों की प्रचलित गरिमा हमारे बीच मौजूद है. पापा से मुझे कुछ कहना होता है तो माँ जरिया बनती है और यही स्थिति पापा की भी है. हालांकि, अब कई बार संवाद सेतु की आवश्यकता नहीं होती है लेकिन स्थिति […]

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ओमुआमुआ : वह अतीत का अग्रदूत!

अंतरिक्ष मेरे लिए हमेशा से बहुत रहस्मयी रहा है, बचपन से ही रात के आसमान को तकने की आदत रही है…. बहुत सारे ऐसे अद्भुत दृश्य बिना टेलिस्कोप के देखे हैं, लगता था जैसे कोई सिनेमा के परदे पर उभरता दृश्य देख रही हूँ… कभी लिखा था यह – अवकाश का आकाश “पहला नियम …. […]

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जानेमन तुम कमाल करती हो….

बहुत विस्तृत है भाव जगत, जिन्हें शब्दों का बंधन रास नहीं आता, फिर भी अज्ञात को ज्ञात शब्दों में प्रस्तुत करने की मनुष्य की सीमा को तोड़ने की ज़िद लिए तुम हर बार शब्दों के समंदर में कूद जाती हो… जानेमन तुम कमाल करती हो…. कभी ठहर जाया करो उन दो दुनिया के बीच में […]

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गुड्डी मिली? : किरदार के भीतर और बाहर की दुनिया

जीवन में घटने वाली हर महत्वपूर्ण घटना एक फिल्म के समान होती है जिसकी स्क्रिप्ट नियति द्वारा पहले से लिख दी गयी है, साथ में आपका किरदार भी. अब ये आप पर निर्भर करता है कि आप अपना वास्तविक चरित्र उसमें लाए बिना उस किरदार को अपने अभिनय से कितना सशक्त बनाते हो. बावजूद इसके […]

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एक कवि और उनकी कविताएं : दुष्यन्त कुमार

कुण्ठा मेरी कुण्ठा रेशम के कीड़ों सी ताने-बाने बुनती, तड़प तड़पकर बाहर आने को सिर धुनती, स्वर से शब्दों से भावों से औ’ वीणा से कहती-सुनती, गर्भवती है मेरी कुण्ठा – क्वांरी कुन्ती। बाहर आने दूँ तो लोक-लाज मर्यादा भीतर रहने दूँ तो घुटन, सहन से ज्यादा, मेरा यह व्यक्तित्व सिमटने पर आमादा। प्रसव-काल है! […]

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पग घुँघरू बाँध मीरा नाची रे…

रिश्ते खट्टे हो जाएं तो उसमें से थोड़ा जामन निकालकर बहती भावनाओं का दही जमा लेना, फिर उसमें थोड़ा सा मीठा प्रेम डालकर मीठी लस्सी बना कर या मिष्टी दोही बनाकर खुद भी खाना, औरों को भी खिलाना… मेकिंग इंडिया साप्ताहिकी अप्रेल माह – पहला अंक और हाँ, कहते हैं न कोई कुछ नया काम […]

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जीवन, अध्यात्म का प्रकट रूप और अध्यात्म, जीवन का अप्रकट विस्तार

ये जादू मेरे साथ अक्सर घटित होता है, किसी तस्वीर पर एकदम से दिल आ जाता है तो लगता है इस पर कुछ लिख डालूँ, या काश कोई इस पर कुछ लिख दे. या कई बार कोई विचार या वन लाइनर-सा दिमाग में कुछ कौंधता है, तो लगता है काश बस ऐसा कोई चित्र मिल […]

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Thyroid : माया को गलमाया मत बनाइये

जैसे हर गोपी को कृष्ण अपने साथ रास करते दिखाई देते थे वैसे ही Thyroid का हव्वा इस तरह से फैलाया गया है कि हर स्त्री को अपने छोटे मोटे हार्मोनल बदलाव भी थाइरोइड होने की आशंका से घेर लेता है. एक बार आपने उस बीमारी को याद किया कि उसका होना तय है क्योंकि […]

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