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Month: May 2018

प्रेम : कपूर टिकिया सा, जो ख़ुद अपनी गन्ध बिसरा के स्वयं बिसर जाए

प्रेम कोई कथ्य नहीं कोई विचार नहीं जिसे साझा किया जाए शब्दों में कभी कभी लगता है कि प्रेम अहसास भी नहीं. क्योंकि कैसे ही इसे महसूस करना शुरू करो यह खत्म होना शुरू हो जाता है. इसलिये इसे महसूस भी मत करना चाहिए. बस जी लेना चाहिए. प्रेम कोई फूल भी नहीं कि सदा […]

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आत्मा चाहे जितनी पुरानी हो, देह की चाहे जितनी उम्र हो, आप फिर भी बने रहें चिरयुवा

चिरयुवा बने रहने के लिए मनुष्य को कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए. समय निरन्तर प्रवाहमान है. अतः आयु को बढ़ने से कोई रोक नहीं सकता. आयु के हर पड़ाव में मनुष्य कुछ विशेष सावधानियाँ बरतकर स्वस्थ और प्रसन्न रह सकता है. अपनी वृद्धावस्था में जब शरीर अशक्त होने लगता है, उस समय भी […]

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जो तुरंत संतुष्ट हो जाये वही ‘आशुतोष’ है

सेन्स/ न्युसेंस सेन्स और न्युसेंस में अंतर होता है. जिज्ञासा वश पूछे गए प्रश्न सेन्स की श्रेणी में आते हैं और ध्यानाकर्षण के लिए उछाला गया प्रश्न न्युसेंस की श्रेणी में आता है. जिज्ञासा हमें सेन्सिबल व्यक्ति की श्रेणी में रखती है. तो ध्यानाकर्षण हमें नॉन्सेन्सिकल व्यक्ति के रूप में प्रतिष्ठित करता है. स्मरण रखिए- […]

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टेलिफ़ोन धुन में हँसने वाली मनीषा : ‘सौदागर’ से ‘डियर माया’ का सफ़र कैंसर की राह से गुज़रकर

मनीषा, मुझे पसंद है सिर्फ उसकी सुन्दरता के कारण नहीं, उसकी प्यारी मुस्कान के कारण नहीं, उसके सहज अभिनय के कारण नहीं, बल्कि उसकी जिजीविषा के कारण जिसकी वजह से वो खुद को मौत के मुंह से खींचकर ले आई… अपनी आधुनिक जीवन शैली के लिए हमेशा चर्चा में रही मनीषा ने उन दिनों सबसे […]

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ओ हंसिनी… कहाँ उड़ चली…

लड़की अठारह बरस की हुई थी पिछले महीने. लड़की अपनी दादी को बेहद प्यार करती थी और अपने स्कूल की सारी बातें उनको आकर बताया करती थी. लड़की की दादी बहुत प्यारी दादी थीं. सांवले चेहरे पर अनगिन झुर्रियों के बीच जब दादी आँखें मींच खिलखिलातीं तो लगता मानो देर रात बादलों से ढके समंदर […]

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डॉक्टर साहब मेरा बच्चा सब्ज़ी नहीं खाता, क्या करूं?

मेरा बच्चा सब्ज़ी नहीं खाता, क्या करूं?? लगभग हर माँ को इस समस्या से दो चार होना पड़ता है. मैंने इसी समस्या को सुलझाने के लिए कुछ छोटे छोटे लेकिन महत्वपूर्ण और उपयोगी टिप्स शेयर करने की कोशिश की है. आइये जानते हैं, कुछ छोटे छोटे लेकिन रोज़मर्रा के कुछ जरूरी सूत्र. 1. बच्चों के […]

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कुछ दिल ने कहा… कुछ भी नहीं…

संवाद की उत्कंठा की पराकाष्ठा पर ही प्रस्फुटित होता है मौन. मौन, जो उस कल्पवृक्ष का बीज है, जो प्रार्थनाओं के पानी से पाता है अपना सम्पूर्ण स्वरूप…. प्रेम-यात्रा की राह पर खड़ा यह कल्पवृक्ष उस मील के पत्थर के समान है, जहाँ से तुम जब भी दुबारा गुज़रोगे, तुम्हें याद आएंगी वो बातें, जो […]

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जब तक श्रम नहीं करेंगे, पाप नहीं धुलेंगे, जब तक पाप नहीं धुलेंगे, फैट नहीं घुलेंगे

आधुनिक जीवन शैली ने हमें और कुछ दिया हो या ना दिया हो, एक बहुत ही आरामदायक ज़िंदगी ज़रूर दी है. बस एक बटन दबाओ और काम शुरू और इससे बड़ी बात काम ख़त्म होने पर बटन बंद करने जितनी मेहनत भी नहीं करना है. फिर चाहे रसोई में माइक्रोवेव अवन का बटन हो या […]

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सती -2 : जब पत्नी और पति के विचार एकाकार होते हैं, तब वह सती होती हैं

आप लोगों से निवेदन है कि पहले “सती” पर आप लोग पहला लेख पढ़ लें उसके पश्चात इसे पढ़ें. जैसा कि मैने पहले भी लिखा है तीन महानतम सतियों में सती अनुसूइया, सती सावित्री और सती जब वह शिव की पत्नी थी दक्ष की बेटी के रूप में, तीनों के पति जीवित थे जब उन्हें […]

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भूख

भूख कई तरह की होती है. तन की भूख, मन की भूख, मस्तिष्क की भूख, आत्मा की भूख, परमात्मा की भूख…. व्यक्ति इसी क्रम में अपनी भूख मिटाते हुए जन्मों की यात्रा को पूरा करता है… कई बार किसी को इन सारे पड़ावों को एक ही जन्म में पार कर जाने का सौभाग्य भी प्राप्त […]

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