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हम तो ऐसे हैं भैया

ज्ञान और शिक्षा में अंतर उतना ही है जैसे आत्मा और शरीर में है. आत्मा अपने पूर्व जन्मों से कुछ ज्ञान लेकर आती है जैसे एक बना बनाया घर हो और जन्म के बाद शिक्षा का अर्थ कुछ यूं है जैसे उस घर को सुन्दर बनाने के लिए सजावट का सामान.

तो आपसे मिलते ही सबसे पहले लोगों की नज़र आपके घर की सजावटी वस्तु पर जाती है…

अरे आपके घर में आप कूलर चलाते हैं, आपके पास AC नहीं है?
ओह! अभी तक आप पारंपरिक रसोई घर में खाना बनाते हैं, आपके यहाँ मोड्यूलर किचन नहीं?
आपका सोफा सेट बहुत पुराने ज़माने का है आपको नया चाइनीज़ फर्नीचर लगवाना चाहिए…
आपके पास शेल्फ में कोई एंटिक पीस नहीं, आप तो अभी तक दरवाज़े पर परम्परागत रंगोली ही बनाते हैं…

Power Of Name :
पुकारो मुझे नाम लेकर पुकारो


आपने कभी सोचा है यदि व्यक्ति का नाम ही नहीं होता, तो उसे पहचानना कितना मुश्किल हो जाता. हमारे मन में तो उसकी छवि रहती, लेकिन हमें किसी और को उसके बारे में बताना हो, तो कितनी मुश्किल आती?

लेकिन सिर्फ नाम ले लेना ही काफी नहीं होता, सही जगह सही नाम से पुकारना भी महत्वपूर्ण होता है. मेरा एक दोस्त है, उसका नाम है प्रकाश. ऑफिस में उसे प्रकाश सर कहते हैं, और घर में उसे पकिया. सोचो अब यदि उसे ऑफिस में लोग पकिया और घर में प्रकाश सर कहने लगे, तो उसका तो पूरा रोल ही बदल जाएगा.

हम कुछ प्रसिद्ध लोगों के नाम से इतने प्रभावित हो जाते हैं कि यदि वे अपना नाम बदल दें तो उस व्यक्ति को स्वीकार करना मुश्किल हो जाता है. मान लो यदि ऐश्वर्या शादी के बाद अपना नाम बदलकर संगीता रख लेती तब ऐश्वर्या को आप संगीता नाम से पुकार पाते? क्या अमिताभ और शाहरुख के नाम उनके व्यक्तित्व को और वृहद्द नहीं करते?

फोटोग्राफी : कला,
शौक और जुनून


फोटोग्राफी, छायाचित्र छायांकन, साधारण समझ में ये एक तरीका यादों को संजोने का, पर इसे जुनून की हद तक लेने वाले जानते हैं कि फोटोग्राफी एक कला है, जीवित को मूर्त रूप में जीवित करने की कला.

लोगो के पास कैमरे होते हैं, आंखें होती हैं और वो छायांकन भी करते हैं, पर हर छायांकन, छायांकन नहीं होता क्योंकि हर छवि, कला की दृष्टि से देख कर नहीं ली जाती और इसी समझ को फोटोग्राफी कहते हैं.

मेरे हिसाब से हर इंसान को ये समझ होती भी नहीं और ये समझ कोई कॉलेज या कोर्स आपको दे भी नहीं सकता. किस एंगल से क्लिक कितना प्रभावी होगा? प्रकाश स्रोत किस दिशा से अधिक प्रभावी है, ऐसे बहुत से बिंदु हैं जो फोटोग्राफी को आर्टिस्टिक बनाते हैं. पर इन बिंदुओं की समझ ईश्वर से मिला गुण होता है जो हर कोई नहीं समझ पाता.

आज कल के DSLR कैमरे के ज़माने में महंगे कैमरे को अच्छी फोटोग्राफी...

कालबेलिया : नागलोक की परियों का धरती पर नृत्य


काला रंग मुझे हमेशा से आकर्षित करता है. कहते हैं काला रंग काला इसलिए है क्योंकि वो सारे रंगों को सोख लेता है, परावर्तित नहीं करता…

तो इन नागलोक की परियों ने भी जैसे जीवन के सारे रंग सोख लिए हैं, और फिर इनको लिए जब गोल घूमती हैं तो लगता है जैसे इनसे निकलकर वो सारे रंग इनके चारों ओर इनको देखने वालों के दिलों को रंगीन कर रहे हैं…

ये जो रेगिस्तान में, उड़ती रेत का भंवर भी होता है ना, वो हवा के या तूफ़ान के चलने से नहीं होता… ये नागलोक की परियां काले लिबास में गोल घूमती हुई नृत्य करती है तो इस भंवर का मन भी भंवर में फंस जाता है…

बलखाती भुजाओं में जीवन का समंदर बलखाता सा प्रतीत होता है … जिससे लटकती सीपियों में न जाने कौन से मोती छुपे होते हैं कि काले लिबास वाली रुदालियों से दुःख भी विस्मृत हो जाते हैं…

सद्गुरु से जानिये थाइरॉइड समस्या और उसका समाधान


आप जिसे थाइरॉइड कह रहे हैं – योग में हम इन ग्रंथियों को इस तरह से नहीं देखते, लेकिन मेडिकल दृष्टि से, आप जिसे थाइरॉइड कह रहे हैं, वो आपके भीतर एक ऐसा स्राव है, जो आपके सिस्टम को नियंत्रित या कैलिब्रेट करता है, हर रोज़.

यह तय करता है कि कितना पाचन होना चाहिए, कितनी ऊर्जा पैदा होनी चाहिए, कितना फैट पैदा होनी चाहिए, कितनी मांसपेशी बननी चाहिए, हर चीज. ये आपकी शारीरिक संरचना को संतुलित करने की कोशिश करता है.

आपके शरीर की संरचना, आपकी मनोवैज्ञानिक संरचना से गहरा संबंध रखती है. आज, आपको यह दिखाने के लिए पर्याप्त प्रमाण मौजूद हैं कि अगर आप यहाँ बैठकर पहाड़ के बारे में सोचते हैं, तो आपकी ग्रंथियां एक तरह से काम करेंगी.

अगर आप शेर के बारे में सोचते हैं, तो ये किसी और तरीके से काम करेंगी. अगर आप समुद्र के बारे में सोचते हैं, तो ये किसी और तरीके से काम करेंगी. अगर आप किसी आदमी या औरत के बारे में सोचते हैं, तो ये किसी और तरीके से काम करेंगी.

5 Minutes Craft : छोटे परिवर्तन लाएं बड़े बदलाव


चिरयुवा बने रहने मैंने अक्सर गृहणियों को रोज़-रोज़ एक ही तरह के काम से उकताते हुए देखा है. एक ही ढर्रे पर काम करते हुए वो उसकी इतनी अभ्यस्त हो जाती है कि उनको नींद में से उठाकर भी कुछ पूछ लो तो किसी भी वस्तु के बारे में बिलकुल सही-सही जानकारी दे देंगी.

लेकिन यह एकरसता उनके जीवन में इतना अधिक ठहराव ले आती है कि वो किचन में चम्मच और चाकू की जगह का अचानक बदल जाना भी स्वीकार नहीं कर पाती. हल्दी नमक मिर्च की एक जैसी मात्रा ही की तरह उनके जीवन की रेसिपी में भी ज़रा सा भी चढ़ता हुआ नमक या मिर्च उन्हें घबराहट दे जाता है.

उनके महीने भर की किराने की लिस्ट सालों से एक ही तरीके से लिखी गयी है, उसमें किसी नई वस्तु का समावेश करते ही बजट का गड़बड़ा जाना उन्हें भविष्य के लिए चिंतित कर जाता है.

ऐसे लोगों के यहाँ सब्ज़ी भी अमूमन एक ही स्वाद की बनती है, कोई भी नया मसाला मिलाना या स्वाद का बदल जाना उसे मंज़ूर नहीं होता…

और फिर एक दिन इसी एकरसता से...

मोशन से इमोशन तक : पेट साफ तभी तो वज़न से इंसाफ़


आपके शरीर का ही नहीं आपकी चेतना का सम्बन्ध भी आपके पेट से होता है इसलिए किसी भी तरह की परेशानी आप झेल रहे हैं तो उसका सीधा सम्बन्ध आपके खान पान में गड़बड़ के कारण है.

जितना अधिक हो सके ऐसी सब्ज़ियाँ खाएं जो कच्ची खाई जा सकती हो, सलाद खाना इसलिए भी फायदेमंद है. इससे दो फायदे हैं – एक तो पेट को जितना अधिक फाइबर मिलेगा पेट उतनी जल्दी साफ़ होगा, दूसरा आपके दांतों की सफाई भी होती है.

और पेट जितना अधिक साफ़ रहेगा शरीर में उतनी अधिक स्फूर्ति बनी रहेगी. पेट में पड़ा मल न सिर्फ शरीर बल्कि आत्मा पर भी बुरा प्रभाव डालता है.

डॉ विपिन गुप्ता कहते हैं जिस कमोड व्यवस्था के दुष्परिणाम समझने में अंग्रेज़ों को दो सौ साल लग गए और वो अब उसके लिए विकल्प खोज रहे हैं, उस व्यवस्था को हम भारतीय लोग अपना कर हमारी उकडू बैठकर शौच करने की व्यवस्था को पिछड़ा मानकर अपने ही शरीर के साथ...